#नास्तिक_और_आस्तिक
आचार्य रोहित वशिष्ठ
7नवम्बर2021
भारत के मूर्धन्य वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता, भारत रत्न #चंद्रशेखर_वेंकटरामन् अत्यंत व्यस्त होते हुए भी ईश्वर की आराधना और अपने कुल के अनुरूप धर्माचरण में प्रतिदिन कुछ समय अवश्य देते थे ।
एक बार जब वे संध्यावंदन करके उठे तो एक अन्य भारतीय वैज्ञानिक, जो उनसे मिलने आया था और ईश्वर में विश्वास नहीं रखता था, कहने लगा – श्रीमान! आप वैज्ञानिक होकर भी ऐसी बातों पर विश्वास करते हैं , जो विज्ञान से प्रमाणित नहीं हैं। आप प्रतिदिन धर्म-कर्म के लिए आधा घंटा नष्ट कर देते हैं, किस प्रयोजन से?
वैंकटरामन् ने उत्तर दिया अपना परलोक सुधारने के लिए । मृत्यु के बाद सद्गति हो इसलिए ।
नास्तिक वैज्ञानिक ने बड़ी उपेक्षा से उत्तर दिया कहाँ है परलोक ? मृत्यु के बाद क्या होगा किसने देखा है ? आपको मालूम है क्या ? ईश्वर कहीं है क्या ? आपने देखा है क्या ?
वेंकटरामन् ने शालीनता से कहा बंधु मैं भी वैज्ञानिक हूं और यह मानता हूं कि न तो ईश्वर को किसी ने देखा है , न हीं इस बात पर मुझे विश्वास है कि परलोक है और मृत्यु के बाद ऐसे धर्म-कर्म से कोई स्वर्ग जा सकता है ।
मैं मानता हूँ कि सत्यापित किए बिना किसी बात को अंधानुकरण के रूप में नहीं मानना चाहिए ।
अब मैं आपसे पूछता हूँ कि क्या आपने आपके विज्ञान ने यह सत्यापित कर दिया है कि ईश्वर नहीं है ? क्या यह निश्चित कर लिया है कि मृत्यु के बाद यह होगा , और यह नहीं होगा ।
नास्तिक वैज्ञानिक ने उत्तर दिया― यह सभी बातें अनिश्चित हैं । प्रमाणित नहीं । आप भी उन्हें मानने लगे ? कौन कह सकता है कि ईश्वर है या नहीं ? मृत्यु के बाद क्या होगा ?
श्री वेंकटरामन् जी ने कहा कि ' यह सच है यह बात बिल्कुल अनिश्चित हैकि ईश्वर का , परलोक का , पुनर्जन्म का , मृत्यु के बाद की गति का कोई अस्तित्व भी है या नहीं ― यह सब संभावना मात्र हैं । हो सकता है कि यह नहीं हों , यह भी हो सकता है कि यह हों ।
यदि यह सब मिथ्या है और नहीं है तो प्रतिदिन मेरा आधा घंटा धर्माचरण में व्यर्थ नष्ट हुआ माना जाएगा ।
कोई बात नहीं कभी-कभी व्यर्थ के काम में भी कुछ समय नष्ट हो जाए तो अनर्थ नहीं हो जाता ।
पर कल्पना करो कि यदि यह सब सत्य हो , वास्तव में हो । तो क्या होगा ?
यदि इस संभावना के नाम पर हम अपने आप को किसी दैनिक नियम से बांध लें तो क्या बुरा है ?
यदि इसके बिना परलोक में दुर्गति की स्थिति हुई तो आपका क्या होगा ?
उस नास्तिक वैज्ञानिक के पास इसका कोई उत्तर नहीं था । हो भी नहीं सकता ।
वासुदेवकल्याणम्
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