शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

रावण व कुम्भकर्ण संवाद

कुम्भकर्ण ने रावण से कहा-भाई स्त्री स्वभावतः भीरू होती हैं। सीता को भय दिखाकर अपनी पत्नी बना लेते ।
रावण बोला- भाई मैने ऐसा किया था। जब मैने उस सीता को अपनी चन्द्रह्रास खड्ग से भयभीत करना चाहा तो उसने एक तृण दिखाकर मुझे ही भयभीत कर दिया।
कुम्भकर्ण ने कहा-उसे धनादि का लोभ देते।
रावण ने कहा-मैने उसे प्रधान रानी होने का लोभ दिया लेकिन उसने मेरी ओर देखा तक नहीं। 
कुम्भकर्ण पुनः बोला- भाई तुम तो मायावी हो। अरे राम रूप धरकर उसके पास जाते तो निश्चय ही वो तुम्हें प्राप्त हो जाती।
रावण ने कहा - ऐसा मैनें किया था लेकिन जैसे ही मैनें रामरूप धारण किया मन्दोदरी और अन्य रानियों के अतिरिक्त जिस भी स्त्री को निहारता उसमें मुझे अपनी  माँ केकशी नजर आती।
कुम्भकर्ण ने कहा - राम विग्रहवान धर्म है
रावण तुम्हारी और राम की कौई बराबरी नहीं ।
विभीषण की भाति ही तुम्हें भी धर्म की शरण ग्रहण करनी चाहिये।

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