महाशिवरात्रि पर विशेष लेख
मंगलवार 1 मार्च 2022 1 मार्च 2022
आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ
सिद्ध पीठ श्री बगलामुखी मंदिर ब्रह्मपुरी कॉलोनी ,पेपर मिल रोड सहारनपुर ,
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भगवान शिव को अत्यंत प्रिय महाशिवरात्रि कही गई है ।
भगवान शिव के अवतरण के मंगल सूचक के रूप में इस व्रत को किया जाता है।
महाशिवरात्रि को ही भगवान शिव इस भूमंडल पर निराकार से साकार रूप में ब्रह्मा और विष्णु जी के सम्मुख करोड़ों सूर्य के प्रकाश के समान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे । सनातन शिव भक्तों में यह व्रत
" व्रतराज " के नाम से विख्यात है। भगवान के निष्काम और सकाम भक्त इस व्रत को जीवनपर्यंत करते हैं । भगवान शिव भोग और मोक्ष दोनों को देने वाले हैं। जिन्हे सांसारिक विषय वासनाओं से मुक्ति चाहिए उन्हे तो यह व्रत करना ही चाहिए साथ ही साथ सांसारिक सुख चाहने वाले भी शिवरात्रि का व्रत अवश्य करना चाहिए।
इस वर्ष की महाशिवरात्रि का विशेष योग
मंगलवार धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ व शिव योग इस वर्ष की महाशिवरात्रि को विशेष बना रहें हैं।
इस प्रकार के योग में शिवार्चन करने से शत्रु शमन होता है तांत्रिक क्रियाओं से निवृत्ति होती है। शत्रु पराभव को प्राप्त होते हैं।
प्रत्येक सनातन धर्मी को प्रयत्नपूर्वक महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए ।जो व्यक्ति पूरे वर्ष भगवान शिव की पूजा नहीं कर सकता। वर्ष में केवल एक दिन महाशिवरात्रि पर व्रत एवं पूजन करने से एक वर्ष तक किए गए शिवपूजन का फल उसे प्राप्त हो जाता है।
महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रहों का विशेष योग बन रहा है । 12 वें भाव में मकर राशि में पंचग्राही योग बनेगा । इस राशि में मंगल और शनि के साथ बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे । लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति बनी रहेगी । चौथे भाव में राहु वृषभ राशि में रहेगा, जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा।
महाशिवरात्रि के दिन सुबह 11.47 से दोपहर 12.34 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा । इसके बाद दोपहर 02.07 से लेकर 02.53 तक विजय मुहूर्त रहेगा । पूजा या कोई शुभ कार्य करने के लिए ये दोनों ही मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ हैं । शाम के समय 05.48 से 06.12 तक गोधूलि मुहूर्त रहने वाला है ।
कैसे करें महाशिवरात्रि व्रत
महाशिवरात्रि के व्रत में शिव पूजन, शिव मंत्र का जप, रात्रि के चार पहर की पूजा एवं जागरण को विशेष माना गया है।
प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करे । भगवान शिव की पूजा में गले में रुद्राक्ष की माला, माथे पर भस्म या चन्दन का त्रिपुंड और मुख में भगवान शिव का नाम यह विशेष फल देने वाले कहे गये है। शिव पूजन करने से पूर्व अपने शरीर पर रूद्राक्ष मस्तक पर भस्म और जिह्वा पर शिव नाम अवश्य धारण करना चाहिए । हाथ में जल लेकर सर्वप्रथम महाशिवरात्रि व्रत रखने का संकल्प करें ।भगवान से प्रार्थना करें कि हे शिव आपकी प्रसन्नता के लिए मैं महाशिवरात्रि का व्रत कर रहा हूं मेरे इस व्रत को आप पूर्ण करने की कृपा करें ।
इस प्रकार मानसिक संकल्प कर शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
यदि संभव हो तो किसी वेद मंत्रों के जानने वाले ब्राह्मण के माध्यम से शिवपूजा करनी चाहिए। यदि ऐसा न हो सके तो स्वयं ही पूजा करनी चाहिए ।
भगवान शिव की पूजा भगवान शिव के नाम अथवा मंत्र से करनी चाहिए ।
भगवान शिव का सबसे सर्वोत्तम और सरल मंत्र " नमः शिवाय " है। जो व्यक्ति यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकारी है और यज्ञोपवीत धारण करता है उसे " ओम नमः शिवाय " बोलना चाहिए ।
अन्य सभी को " नमः शिवाय " कहकर शिव पूजन करना चाहिए।
स्त्रियाॅं " शिवाय नम:" का जप करें।
धर्म कार्य सदैव धर्मशास्त्रों को आधार बनाकर ही करना चाहिए। मनमाने ढंग से की गई पूजा का फल तो मिलता ही नहीं साथ ही पाप का भागी भी बनना पड़ता है। सनातन नियमों का पालन करते हुए ही भगवान शिव की आराधना एवं पूजन करना चाहिए।
शिवपूजन से पूर्व श्री गणेश,मां पार्वती,श्री नंदी,कार्तिक,कुबेर,कीर्तिमुख,गंगा,यमुना,सरस्वती एवं नाग आदि शिव गणों की पूजा की जाती है। शिव गणों की पूजा करने के पश्चात ही भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए ।
प्रत्येक वस्तु को अर्पण करते समय अपने अधिकार के अनुसार पंचाक्षर मंत्र जप करना चाहिए।
भगवान शिव का जल से अभिषेक करना चाहिए। उसके पश्चात भगवान शिव को दूध ,दही, गाय का घी, शहद ,शक्कर इनसे अलग अलग या इन पांचों को एक साथ मिलाकर शिवलिंग पर अर्पण करें ।उसके पश्चात भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराएं । भगवान शिव को वस्त्र अर्पण कर एक जनेऊ भी अर्पण करे। भगवान शिव को चंदन का तिलक करें बिना टूटे साबुत चावल शिवलिंग पर चढ़ाएं । भगवान को पुष्प व पुष्पमाला चढ़ाएं । बेलपत्र अर्पण करें, बेलपत्र तीन की संख्या में होने चाहिए। भांग धतूरा भी चढ़ाना चाहिए ।भगवान को धूप दीप दिखाएं। भगवान को भोग लगाएं भगवान को फल और पान अर्पण करें साथ ही भगवान शिव को दक्षिणा भी अर्पण करें । इस इस प्रकार भगवान शिव की यह पूजा पूर्ण होती हैं। प्रदोष काल में शिव मंदिर में जाकर पहले पहर की पूजा करनी चाहिए।
ऊपर बताई गई विधि से ही शिव पूजन करना चाहिए ।
रात्रि में चार पहर की पूजा करने के पश्चात अगले दिन प्रातः काल स्नान करके पुनः भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए इस प्रकार अलग अलग समय में पूजन करके रात्रि में जागरण करके भगवान शिव की पूजा करने से पूरे वर्ष किए जाने वाले शिव पूजन एवं जप का फल एक ही दिन में प्राप्त हो जाता है। विधि पूर्वक भगवान की गई भगवान शिव की पूजा मनोवांछित फल को प्रदान करती है।
शिव पूजन का शुभ मुहूर्त
मंगलवार 1 मार्च 2022
प्रातः 4:10 से 6:47 तक
उसके पश्चात
प्रातः 9:40 से दोपहर 1:59 तक
उसके पश्चात
चार प्रहर की पूजा का समय
पहले पहर की पूजा
सायं 6:30 से 9:30 तक
दूसरे पहर की पूजा
रात्रि 9:30 से 12:30 तक
तीसरे पहर की पूजा
रात्रि 12:30 से 3:30 तक
चौथे पहर की पूजा
प्रातः 3:30 से 5:30 तक
©आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ
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